Thursday, April 25, 2024

ये हैं रूपेश कुमार कौशल

ये हैं रूपेश कुमार कौशल। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ हिस्ट्री ऑफ आर्ट के चौथे सेमेस्टर के विद्यार्थी हैं। कला और कला की बारीकियों की अच्छी समझ रखते हैं। इन्होंने अपने रिसर्च प्रेजेंटेशन का विषय #झारखंड की #लोक चित्रकाला शैली #जादोपटिया_पेंटिंग को चुना। जाहिर है, पहले इन्होंने इंटरनेट पर और यात्र-तत्र उपलब्ध सामग्रियों में अपने रिसर्च प्रेजेंटेशन के लिए कंटेंट और कॉन्सेप्ट तैयार करने की संभावनाएं तलाशी, किंतु चूंकि ये बीएचयू के छात्र है और इनमें कला के अध्ययन को लेकर ठोस दृष्टि है, इसलिए इंटरनेट की सामग्रियों में निहित अप्रामाणिकता, तथ्यात्मक त्रुटियों और भ्रांतियों को इन्हें सहजता से पहचाना। इन्होंने दो आलेख की प्रति भी मुझे दिखाईं, जिनमें से एक आलेख किसी अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में छपा है और उसके लेखक द्वय में से एक बेंगलुरु के एक विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष और दूसरी उसी विश्वविद्यालय में उसी विभाग की शिक्षिका हैं। उनका आलेख पढ़कर दुख हुआ कि लेखन मात्र के लिए दोनों ने इतनी असावधानी बरती कि वे इस पेंटिंग का नाम तक सही नहीं लिख सके, इस पेंटिंग के क्षेत्र तक का नाम भी सही नहीं लिख पाए, बाकी त्रुटियां तो हैं ही। जाहिर है, ऐसे असावधान और अतार्किक अनुकरणात्मक लेखन से निश्चित रूप से उस कला को नुकसान होता है, जिसकी तलाश, जिसके नामकरण और जिसके प्रसार में मैंने 34 साल खर्च किए और जो कला हम सब के लिए गौरव का विषय है। रूपेश ने कहीं से सूत्र तलाशा और वाराणसी से चल कर मेरे पास आए। इन्हें मेरी शुभकामनाएं। अपना अनुभव वह खुद बता रहे हैं। आप भी सुनें। #Jadopatia_Painting #Japotatiya_Painting Mobile - 8789097471

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